Friday, 15 May 2020
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मैं शहर सा .... शान्त ,एकान्त , उपेक्षित खड़ा हूं तुम्हारे इंतज़ार में वर्षों बीते ,घर रीते उम्मीदों के छेद सीते सीते घास पीली पड़ ग...
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दोस्ती का फर्ज़ (लेेखक MR, Rajan kumar May 12, 2019 Rajan कि अपनी दोनों टांगों को लटकाये हुए स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैठा हुआ थ...




